शुक्रवार, दिसम्बर 3

गोरखपुरवासियो के लिए बड़ी खुशखबरी, शहर मे बनेगा 26 KM लम्बा फोरलेन सड़क और तीन ओवरब्रिज बजट 250cr.

प्रदेश सरकार गोरखपुर शहर से देवरिया सीमा तक करीब 26 किमी के मार्ग को चार लेन में तब्दील करेगी। साथ ही महानगर के गुरुंग तिराहे से लेकर खोराबार तक पांच किमी लंबी सड़क को मॉडल रोड बनाया जाएगा। मॉडल सड़क के दोनों तरफ पाथवे, अंडरग्राउंड सीवेज और सर्विस लेन बनेगा। सोमवार को इस कार्य के लिए कैबिनेट से 250.94 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल गई है। एम्स के निर्माण की वजह से गुरुंग तिराहे से गिरधरगंज बजार, प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी होते हुए खोराबार की सड़क काफी अहम हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों पांच किमी लंबी सड़क को मॉडल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया था।

गुरुंग तिराहे से खोराबार होते हुए देवरिया बार्डर तक 26 किमी लंबी सड़क को नये सिरे से विकसित करने को लेकर पीडब्ल्यूडी ने 267.43 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंजूरी के लिए मुख्यालय को भेजा था। सोमवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट की बैठक में 250.94 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल गई है। इस रकम से पांच किमी लंबी मॉडल सड़क के साथ ही तीन ओवरब्रिज का भी निर्माण होगा। पीडब्ल्यूडी के अफसरों के मुताबिक कड़जहा, मझना नाला और निबिहवा रेलवे क्रॉसिंग पर तीन ओवरब्रिज बनेंगे। इसके चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण पर पहले 15183.97 खर्च का आकलन किया गया था। इसके बाद इसमें कुछ और खर्च शामिल किए गए। इस तरह पुनरीक्षित लागत को मंजूरी मिल गई।

पांच किमी लंबी मॉडल सड़क के दोनों तरफ फुटपाथ, सर्विस लेन और अंडरग्राउंड केबिल डाली जाएगी। अंडरग्राउंड सीवेज सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। सड़क के बीच में डिवाइडर बनेगा। करीब एक मीटर चौड़े डिवाइडर पर पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे। सड़क के दोनों तरफ हरियाली की व्यवस्था होगी। सोनौली-नौतनवा-गोरखपुर-देवरिया से बलिया तक की सड़क राज्य मार्ग संख्या एक के नाम से पहचानी जाती है। सोनौली से गोरखपुर होते हुए बलिया तक जाने वाली सड़क अलग-अलग विभाग विभागों द्वारा बनाई जा रही है। जंगल कौड़िया से नौतनवा होते हुए नेपाल बार्डर सोनौली तक जाने वाली सड़क बन चुकी है।

 

कई जगहों पर सड़क टू-लेन है। एनएचएआई ने फोरलेन निर्माण को लेकर प्रस्ताव भेजा है। पिछले दिनों गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में कैम्पियरगंज बाईपास की जगह यहां टू-लेन फ्लाईओवर बनाने पर सहमति बनी थी। वहीं जंगल कौड़िया से गोरखनाथ मंदिर होते हुए मोहद्दीपुर तक करीब 17 किमी लंबी सड़क पीडब्ल्यूडी का एनएच विभाग बना रहा है। इस फोरलेन का निर्माण मार्च तक पूरा होना है। गुरुंग तिराहे से खोराबार तक पांच किमी लंबी सड़क मॉडल होगी। इसमें नये सिरे से फुटपाथ, सर्विस लेन और डिवाइडर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही चौरीचौरा क्षेत्र में तीन ओवरब्रिज का निर्माण भी होना है। मार्च तक फोरलेन का निर्माण पूरा हो जाएगा।

घाघरा नदी अब सरयू के नाम से जानी जाएगी। यूपी सरकार ने राजस्व विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। नदी का नाम बदलने के इस प्रस्ताव को आगे की मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय भेजा जाएगा। वहां से अनुमति मिलने पर सरकार के सभी अभिलेखों में यह नाम परिवर्तन दर्ज हो जाएगा। कैबिनेट इससे संबंधित प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई। असल में घाघरा नदी नेपाल में कर्णाली व चीन में जियागेलाहे के नाम से जानी जाती है। उत्तरी भारत में यह गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। यह दक्षिण तिब्बत के ऊंचे पर्वत शिखर हिमालय में मापचाचुंगो हिमनद से निकलती है। हिमालय से निकल कर नेपाल होते हुए घाघरा भारत में ब्रह्मघाट स्थान पर शारदा नदी से मिलती है। दोनों नदियों के संगम के बाद यह नदी घाघरा के नाम से जानी जाती है।

उद्गमस्थल से गंगा के संगम रेवलगंज बिहार तक घाघरा नदी की कुल लंबाई 1080 किमी है। भारत में लगभग 970 किमी की यात्रा के बाद बलिया और छपरा के बीच यह गंगा नदी में मिल जाती है। यूपी में यह नदी बहराइच, सीतापुर, गोंडा, बाराबंकी, अयोध्या, अम्बेडकर नगर, मऊ, बस्ती, गोरखपुर लखीमपुर खीरी तथा बलिया जिलों से गुजरती है। यह गंगा के आयतन के अनुसार सबसे बड़ी सहायक गंगा नदी है। निचली घाघरा नदी को सरयू नदी के नाम से भी जाना जाता है। इसका वर्णन रामायण में भी आया है। अयोध्या इसके दायें किनारे पर स्थित है। प्रश्नगत नदी दायें किनारे पर स्थित है।

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