शुक्रवार, दिसम्बर 3

गोरखपुरवासियो के लिए खुशखबरी, 23 मार्च से शुरू होगा नयी ट्रेन का परिचालन, स्थानीय लोगो में हर्ष

मैलानी-नानपारा रेललाइन पर 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन फिर शुरू होगा। रेलवे के इस निर्णय से पर्यटक जहां दुधवा नेशनल पार्क में वन्य जीवों को नजदीक से देख सकेंगे वहीं स्थानीय लोगों का आवागमन भी आसान होगा। 16 फरवरी से इस रेल मार्ग पर ट्रेन बंद होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी थी। कोर्ट के आदेश पर वन्य जीवों को संरक्षित करने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने इस रेललाइन को बंद कर दिया था। इसको लेकर स्थानीय लोगों और जन प्रतिनिधियों के आक्रोश को देखते हुए मामला एक बार फिर कोर्ट पहुंच गया।

इधर, 14 मार्च को वाराणसी में हुई समीक्षा बैठक के दौरान रेल मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष मामला उठा तो उन्होंने भी इस रेल मार्ग पर ट्रेन चलाने के लिए निर्देशित किया। रेलवे प्रशासन ने जनभावनाओं को देखते हुए रेल मार्ग को खोलने का निर्णय लिया है। 170 किमी रेलमार्ग पर एहतियातन 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाई जाएंगी। भविष्य में इस रेल लाइन का भी आमान परिवर्तन हो सकता है।

मैलानी-नानपारा रेल मार्ग पर पैसेंजर ट्रेनों का संचलन 23 मार्च से शुरू किया जाएगा। बहराइच-नानपारा-नेपालगंज रोड रेलमार्ग पर पूर्व निर्धारित समय और ठहराव के अनुसार ट्रेनें चलेंगी। – पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनई रेलवे। उधर, पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने शुक्रवार को एहतियातन रेल म्यूजियम और सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम को बंद कर दिया। रेलवे स्टेशन पर भी लगभग सन्नाटा पसरा था। गोरखपुर से चलने वाली अधिकतर ट्रेनें खाली ही गईं।

काउंटरों से भीड़ गायब थी। 50 रुपये कीमत होने के बाद प्लेटफार्म टिकट की बिक्री करीब 75 फीसद घट गई। जनरल टिकटों की बिक्री भी कम हो गई है। रेलवे आरक्षण कार्यालय (पीआरएस) में आरक्षित टिकटों का निरस्तीकरण बिक्री से बढ़ गया है।आरक्षित टिकटों के निरस्तीकरण से पीआरएस को जनरल टिकट घर से पैसा उधार लेना पड़ रहा है। बुधवार को पीआरएस ने चार लाख रुपये उधार लेकर किराया वापस किया। 1387 टिकट बुक हुए जबकि 1693 टिकट निरस्त हुए। गुरुवार को भी यही स्थिति रही।

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए रेलकर्मियों ने कार्यालयों में हवन करना शुरू कर दिया है। गुरुवार को गोरखपुर मुख्यालय स्थित मुख्य संरक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मियों ने हवन किया। कर्मचारियों का कहना था कि हवन से वातावरण शुद्ध होता है। वायरस का संक्रमण रुकता है। ट्रेनों की एसी बोगियों के बाद अब रेलवे के दफ्तरों से पर्दे भी हटने लगे हैं। सोफे से कवर भी हट रहे हैं। अधिकारी दफ्तरों के गेट पर सैनिटाइजर और मास्क भी रखने लगे हैं। गुरुवार को जनसपंर्क विभाग में इसकी शुरुआत भी हो गई। अन्य कार्यालयों को भी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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