बुधवार, दिसम्बर 8

गोरखपुरवासियों के लिए है ये बड़े पैमाने पर व्यवस्था, हर चुनौती से निपटने को तैयार है अपना शहर

जब राजधानी दिल्ली और देश के कई अन्य बड़े शहरों में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बेड और वेंटीलेटर जैसी सुविधाओं को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में आम गोरखपुरवासी के मन में यह विचार आना लाजमी है कि अगर उसे अपने एक कोरोना मरीज के लिए यहां एक बेड की जरूरत पड़ जाए तो, क्या उसे यह सुविधा हासिल हो सकेगी ?
अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को कोरोना के इलाज के लिए यहां की गई व्यवस्था का जायजा लिया। आपको जानकर खुशी होगी, गोरखपुर अपने अन्य समकक्ष कई जिलों से इस मामले में काफी बेहतर स्थिति में है। सरकार ने बड़े पैमाने पर व्यवस्था बनाई है।

इसके साथ ही हम गोरखपुरवासियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि कोरोना से बचाव के उपायों, मसलन मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग आदि का सौ प्रतिशत पालन करें, ताकि न तो कोरोना के मरीज बढ़े और ना ही मौजूदा चिकित्सकीय सुविधाओं पर अनावश्यक भार पड़े-

कोरोना वायरस की चुनौतियों से निपटने के लिए गोरखपुर तैयार है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और रेलवे अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में 663 बेड कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। 44 बेड पर वेंटीलेटर की सुविधा है। जरूरत पड़ी तो 629 और बेड पर कोरोना मरीजों का इलाज किया जा सकता है। इसके लिए सरकारी, गैर सरकारी और अस्थायी अस्पतालों की व्यवस्था की गई है।

 

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 200 बेड का कोरोना वार्ड है। इसमें गोरखपुर, बस्ती मंडल के 101 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसी तरह रेलवे अस्पताल में भी 200 बेड हैं। इसमें से 46 पर कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल के 23 बेड पूरी तरह से खाली हैं। इसमें चार बेड वेंटीलेटर युक्त है। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. श्रीकांत तिवारी का कहना है कि स्वास्थ्य महकमा हर चुनौती से निपटने को तैयार है।

 

गोरखपुर और बस्ती मंडल की बात करें तो सात जिलों में बीआरडी मेडिकल कॉलेज को 200 बेड के लेवल-वन और टू के वार्ड के तौर पर तैयार किया गया है। इनमें मौजूदा समय में केवल लेवल-टू के मरीज भर्ती भी हो रहे हैं। लेबल-वन अस्पताल में अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं है। शुक्रवार तक गोरखपुर और बस्ती मंडल के 101 मरीज बीआरडी के लेबल-टू अस्पताल में भर्ती थे।

बीआरडी के अलावा जिले में लेबल-वन के अन्य अस्पतालों में रेलवे अस्पताल, स्पोर्ट्स कॉलेज, जिला अस्पताल और सीएचसी चरगांवा शामिल हैं। अभी तक रेलवे अस्पताल में ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बाकी लेबल वन के अस्पतालों के बेड कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।

 

जिस हिसाब से कोरोना मरीज बढ़ रहे हैं, उससे निपटने की तैयारी पूरी है। गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय, मूक बधिर विद्यालय, कैंपियरगंज के एक निजी अस्पताल, शाही ग्लोबल और पनेशिया के 629 बेड को सुरक्षित रखा गया है। सीएमओ डॉ श्रीकांत तिवारी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर ही इन अस्पतालों का उपयोग किया जाएगा।

जिले में दो निजी अस्पतालों को भी कोरोना संक्रमितों के इलाज की अनुमति मिली है। यहां स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में ही इलाज होगा। आयुष्मान योजना के नोडल प्रभारी डॉ. एनके पांडेय ने बताया कि शाही ग्लोबल हॉस्पिटल और पेनेशिया हॉस्पिटल में 125 बेड हैं। जरूरत पड़ी तो कोरोना मरीजों को इन अस्पतालों में भी भर्ती कराया जाएगा।

 

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